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सज धज के ek din maut ki shehzaadi aaegi

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Na Sona Kam aayega na chandi aayegi bhajan सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आएगी, ना सोना काम आएगा, ना चांदी आएगी। सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आएगी, ना सोना काम आएगा, ना चांदी आएगी। छोटा सा तू, कितने बड़े अरमान हैं तेरे, मिट्टी का तू, सोने के सब सामन हैं तेरे। मिट्टी की काया मिट्टी में... जिस दिन समाएगी, ना सोना काम आएगा, ना चांदी आएगी॥ अच्छे किये तूने करम तो पाया मानव तन, अब पाप में क्यों डुबा रहा मानव तेरा ये मन? ये पाप की नैया तुझे एक दिन डुबायेगी, ना सोना काम आएगा ना चांदी आएगी।। जैसा किया है तूने तेरे साथ जायेगा, बोये है जब काँटे तूने, कैसे फूल पायेगा? ये पाप कि गठरी तुझे एक दिन डुबायेगी, ना सोना काम आएगा, ना चांदी आएगी॥ भाई भतीजे बन्धु सब मतलब के हैं सारे, कोई नही कुछ काम तेरे आएंगे प्यारे। करनी ही तेरी बावरे तेरे संग जाएगी, ना सोना काम आएगा, ना चांदी आएगी॥ कोठी वही, बंगला वही, बगिया रहे वही। पिंजरा वही, पंछी वही है, बागवां वही। ये तन का चोला आतम जब छोड़ जायेगी, ना सोना काम आयेगा, ना चांदी आयेगी॥ पर खोल ले पंक्षी तू पिंजरा तोड़ के उड़ जा, माया महल के सारे बंधन छोड़ के उड़ ज

बदलना है साधना | Pana nahi Jivan Ko

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पाना नहीं जीवन को, बदलना है साधना। धुएँ सा जीवन मौत है, जलना है साधना॥ मुंड मुड़ाना बहुत सरल है, मन मुंडन आसान नहीं, व्यर्थ भभूत रमाना तन पर, यदि भीतर का ज्ञान नहीं, पर की पीड़ा में मोम सा, पिघलना है साधना। पाना नहीं जीवन को, बदलना है साधना ॥१॥ मन्दिर में हम बहुत गये पर, मन यह मन्दिर नहीं बना, व्यर्थ शिवालय में जाना जो , मन शिवसुन्दर नहीं बना, पल-पल समता में इस मन का, ढलना है साधना। पाना नहीं जीवन को, बदलना है साधना ॥२॥ सच्चा पाठ तभी होगा जब, जीवन में पारायण हो, श्वांस-श्वांस धड़कन-धड़कन में, जुड़ी हुई रामायण हो, तब पर परिणति से चित्त हटा, रमना है साधना। पाना नहीं जीवन को, बदलना है साधना ॥३॥  

Samadhi Bhavna | मृत्यु महोत्सव भारी

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कवि सूरचंद जी कृत समाधि मरण (मृत्यु-महोत्सव पाठ) बन्दौं श्री अरिहंत परम गुरु, जो सबको सुखदाई इस जग में दुख जो मैं भुगते, सो तुम जानो राईं ॥ अब मैं अरज करूँ प्रभु तुमसे, कर समाधि उर माँहीं अन्त समय में यह वर मागूँ, सो दीजै जगराई ॥१॥ भव-भव में तनधार नये मैं, भव-भव शुभ संग पायो भव-भव में नृपरिद्धि लई मैं, मात-पिता सुत थायो ॥ भव-भव में तन पुरुष तनों धर, नारी हूँ तन लीनों भव-भव में मैं भयो नपुंसक,आतम गुण नहिं चीनों ॥२॥ भव-भव में सुर पदवी पाई, ताके सुख अति भोगे भव-भव में गति नरकतनी धर, दुख पायो विधि योगे ॥ भव-भव में तिर्यंच योनि धर, पायो दुख अति भारी भव-भव में साधर्मीजन को, संग मिल्यो हितकारी ॥३॥ भव-भव में जिन पूजन कीनी, दान सुपात्रहिं दीनो भव-भव में मैं समवसरण में, देख्यो जिनगुण भीनो ॥ एती वस्तु मिली भव-भव में, सम्यक् गुण नहिं पायो ना समाधियुत मरण कियो मैं, तातैं जग भरमायो ॥४॥ काल अनादि भयो जग भ्रमते, सदा कुमरणहिं कीनो एक बार हू सम्यक् युत मैं, निज आतम नहिं चीनो ॥ जो निज पर को ज्ञान होय तो, मरण समय दुख काई देह विनाशी मैं निजभासी, ज्योति स्वरूप सदाई ॥५॥ विषय कषायनि के वश होकर, देह आपनो जान्य

Udymen hi sidyanti | Subhashitani

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Udymen hi sidyanti Sanskrit quote   उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥ Na hi suptasya singhsya meaning in Hindi  उद्यम करने से ही कार्य सिद्ध होते हैं। मात्र इच्छा करने से कार्यों की सिद्धि नहीं होती। सोते हुए सिंह के मुंह में आकर के मृग थोड़े ही ना बैठ जाता है। This Subhashitani meaning by word उद्यमेन - मेहनत से हि - ही सिध्यन्ति - पूर्णता को प्राप्त होते हैं कार्याणि - कार्य न - नहीं मनोरथैः - मात्र मन में सोचने से न हि - बिल्कुल नहीं सुप्तस्य - सोए हुए सिंहस्य - सिंह के प्रविशन्ति - प्रवेश करते हैं मुखे - मुख में मृगाः – हिरण उद्यमेन हि सिध्यन्ति भावार्थ हिंदी उद्यम करने से ही कार्य सिद्ध होते हैं। कार्य मनोरथ करने से पूर्ण नहीं होते हैं। सोते हुए सिंह के मुंह में जिस प्रकार मृग प्रवेश नहीं करता है। कार्याणि न मनोरथी English meaning This shlok is the bigger version of  work is worship Working towards a goal can lead us to completion. Only wishing about that won't lead to anything. Similar to how a deer would not prepare itself

XO XO Gossip Girl | Series Review

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Dialogues from gossip Girl All I want is everything You know you love me Spoiler alert! Gossip Girl TV series कल हमने  gossip girl TV series देख कर पूरी खत्म कर दी। गॉसिप गर्ल टीवी सीरीज मस्त थी। यह टीवी सीरीज novels से थोड़ी अलग थी। हमने gossip Girl novels तो पढ़ें नहीं है, पर सुना है कि गॉसिप गर्ल अपनी पहचान अंत तक किसी को नहीं बताता या बताती है। ‌ Spoiler ahead Gossip Girl novel series के बारे में यह भी सुना है कि डेनियल हम्पफ्री गॉसिप गर्ल नहीं हो सकता था। पर कुछ भी कहिए इस टीवी सीरीज में दम थी। इसमें डेनियल हमफ्री को गॉसिप गर्ल बताया गया। पर डेनियल हम्पफ्री अपने बारे में भी जो लिखना था वह सत्य था। वह अपने ऊपर भी उतना ही कठोर था जितना कि वह अपने आसपास के लोगों के बारे में लिखकर रहता था। What did I learn from gossip Girl TV series I have watched all six seasons of Gossip Girl TV series. But, I like last season the most. It is different from the earlier series I have watched. Of all the series this was particularly ended with happy ending. Moreover, it has shown the life of the chara

Topper answers how to score 'A' grade in IGNOU assignment

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Hi friends, do you want to score an 'A' grade in the IGNOU assignment just as I did? IGNOU assignments carry 30 marks out of 100. So the question is why would one want to miss out on the free marks from IGNOU assignments? Yes, they are free, as in IGNOU assignments you get infinite time to submit them. No one will be invigilating you. Can I copy answers from IGNOU books into the IGNOU assignments? The short answer is 'yes'. You can copy answers from IGNOU books into the IGNOU assignments. But, nowadays IGNOU has changed its assignment pattern. IGNOU is mostly asking practical questions in the assignments. Like, discuss the applications of IT in your organisation. So, IGNOU assignments are getting smarter day by day. Despite this, we can copy answers from IGNOU books into the IGNOU assignments. I have scored full marks in IGNOU assignments. I can say that IGNOU books are enough to answer most of the IGNOU assignment's questions. Why IGNOU books are enough to answer

आराम हराम है | 'Aaram haram hai' deep meaning

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Hi friends, you might have heard this saying, aaram haram hai, what does it mean? Today I am going to tell you that. But, first of all do you know who is the author of the quote aaram haram hai? Author of aaram haram hai Some say that the author of the quote aaram haram hai is pandit Jawaharlal Nehru. But this quote was repeatedly used by Mahatma Gandhi in his conversations. Mahatma Gandhi was the one who have lived this quote and probably the author of aaram haram hai. आराम क्यों हराम है? Why is rest ignoble? आराम हराम इस वजह से है क्योंकि हम उन सभी चीजों से वंचित रह जाते हैं जो हमें जागते वक्त मिल सकती थीं। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति नौकरी से आने के बाद थोड़ा मनोरंजन करता है और उसके बाद वह सो जाता है। वह व्यक्ति सोचता है कि काश नौकरी ना होती, दिनभर छुट्टी होती तो मैं कुछ कार्य कर सकता था, अपना व्यापार भी बाजू में चला सकता था। अब आता है रविवार, जो कि है छुट्टी का दिन‌। पर इस दिन वह व्यक्ति कोई और व्यापार शुरू करने की बजाय आराम करने लगे, तो ना तो वह काम के दिनों का मजा ले पाया और ना ही