देशी रंगाई और छपाई, बंसीधर जी जैन द्वारा रचित। Desi Rangai Chapai

नमस्कार दोस्तों प्रस्तुत है एक ऐतिहासिक पुस्तक जो १९२५ में लिखी गई थी जिसका नाम है देशी रंगाई और छपाई। भारत के पूर्व रंगरेजों के ज्ञान को समेटे हुए यह पुस्तक अद्भुत है

आजकल नेचुरल डाईज या की प्राकृतिक रंगों का बड़ी मांग रहती है। यह प्राकृतिक रंग कैसे प्राप्त होते हैं, कहां से प्राप्त होते हैं, और इनको कपड़ों पर कैसे लगाया जाता है इसका पूरा ज्ञान इस पुस्तक में समाहित है। यह पुस्तक कुल २३० पन्ने की है जिसमें बड़ी विस्तृत तरीके से अपनी ऐतिहासिक कला का वर्णन है। 

पुस्तक बड़े ही सरल शब्दों में है इसको सामान्य लोग भी पढ़ सकते हैं।

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प्रस्तुत है देशी रंगाई और छपाई की पीडीएफ कॉपी।


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